Thursday, April 29, 2021

धमनियों में असंख्य तितलियां उड़ चलीं


 तुम-मुस्कुराए

मेरे सारे रूमाल सूख गये।


तुमने बोला-धप्पा

मेरा बचपन जीवंत हो उठा।


तुमने किया- विश्वास

मैंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली।


तस्वीर हेतु आभार इशीता दत्ता












तुमने सहलाये-कपोल

पलकें मूंद कर भी मैंने ढाई आखर पढ़ लिये।


तुमने लिया-चुम्बन

धमनियों में असंख्य तितलियां उड़ चलीं।


तुमने कहा- 'तुम मेरी हो'

मैंने घरौंदा बांध लिया।


तुमने दी-शक्ति

तमाम विरोध रणछोड़ हो गये।


तुमने-जीता मुझे

कोलम्बस घर लौट गया।


तुमने किया- प्रेम

मैं जड़- चेतन हो गयी।


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