तुम-मुस्कुराए
मेरे सारे रूमाल सूख गये।
तुमने बोला-धप्पा
मेरा बचपन जीवंत हो उठा।
तुमने किया- विश्वास
मैंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली।
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| तस्वीर हेतु आभार इशीता दत्ता |
तुमने सहलाये-कपोल
पलकें मूंद कर भी मैंने ढाई आखर पढ़ लिये।
तुमने लिया-चुम्बन
धमनियों में असंख्य तितलियां उड़ चलीं।
तुमने कहा- 'तुम मेरी हो'
मैंने घरौंदा बांध लिया।
तुमने दी-शक्ति
तमाम विरोध रणछोड़ हो गये।
तुमने-जीता मुझे
कोलम्बस घर लौट गया।
तुमने किया- प्रेम
मैं जड़- चेतन हो गयी।

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