Monday, June 28, 2021

गुजारा

 सुबह की पहली किरण

आँगन से निकलती हुई

भीगी मिट्टी की

सोंधी-सोंधी खुशबू से

नींद खुलती है।

photo credit pixbay from pexel






दिन चढता 

भीगी मिट्टी

सूरज की उत्ताप किरणों से

जलती नजर आती है

जलती है,

और जलती है

बार-बार जलती है

जलने की बू आती है

बारह बजते हैं

जलना चरमोत्कर्ष पर होता है।


फिर धीरे-धीरे 

चिंगारी बुझने लगती है

रात बढती है

सिर्फ बढती है।


और फिर 

ठंडे-चूल्हे से निकलता धुआँ

जब दम-घोंटू बन जाता 

तब जी मचलता है

नींद आने लगती है

और पता नहीं कब

और, एक रात गुजर जाती है। 

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