Sunday, May 2, 2021

ज़िद अभी बाकी है


माना मौसम की तबीयत थोड़ी नासाज़ है
पर जिस्म की हरारत तो अभी बाकी है।

माना गहरे अंधेरे खौफ़जदा करते हैं
पर उजाले की उम्मीद तो अभी बाकी है।















माना टूटता हैं हौसला हर शिकस्त पर
पर जीतने का अरमान तो अभी बाकी है।

माना दुश्मन भी इंसान और है दोस्त भी
पर इंसानियत पर यकीन तो अभी बाकी है।

माना पंखों के कतरन बिखरे हैं जमीं पर
पर उड़ने का ज़िद जुनून तो अभी बाकी है।

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