Monday, June 4, 2018

लिंक फेल

    बाबूजी की तबीयत अचानक बिगड़ जाने से घर में हड़कम्प मच गया। हमेशा हँसते-हँसाते बाबूजी को यूँ देखना किसी को भी गँवारा न था। सभी बदहवास, सभी बेचैन।

अम्बूलेंस बुलायी गयी। बिना विलम्ब उन्हें अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने भी देरी न की। सारी जाँच-पड़ताल, टेस्ट-वेस्ट कर जल्दी नतीजे बताये कि ऑपरेशन करना होगा, दिल का दौरा पड़ा है। पैसे जमा करवा दें।

Photo by Muskan Anand from Pexels


छोटे को छोड़ बाकी दो भाई बाहर रहते थे। छोटे के पास पर्याप्त धन न था। उसने भाइयों को खबर दी। बड़ा-मंझला बैंक की ओर भागे। शायद दिन बुरा था या बाबूजी के दिन पूरे हो आए थे। हर बैंक एक ही कहानी कह रहा था – कम्प्यूटर में कनेक्शन नहीं है। भटक-भटककर पागलों की-सी हालत हो गई। आधुनिक जीवन की सुविधाओं से ज्यादा मजबूरियाँ अब भलीभांति समझ आने लगी।

छोटा डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़या लेकिन पेशे की मजबूरी की हवाला अनुरोध पर भारी पड़ने लगा। यहाँ बाबूजी की अवस्था और खराब होने लगी। बड़े और मंझले ने बैंक की ओर फिर दौड़ लगाई। लेकिन फिर वही जवाब आया ‘लिंक फेल’। वृहस्पतिवार था, अतः गहने भी न बिके।

थककर, हताश होकर घरवालों को फोन पर खबर दी कि पैस ट्रांसफर नहीं कर पा रहे। यहाँ बुरी खबर इंतेजार कर रही थी। बाबूजी नहीं रहे। मातम छा गया।


छोटे के मुँह से घोर निराशा में निकल गया – ‘लिंक फेल’।  

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