वादियों के नशे में चूर यह जमीं
बयां कर पाती जो दास्तान-ए-इश्क
तेरी मेरी,
तो जिन्दगी का गुड़ घुल जाता
सुनने वालों के मुंह में,
तेरी मेरी,
तो जिन्दगी का गुड़ घुल जाता
सुनने वालों के मुंह में,
और दे जाता वह रुमानी अहसास
जिसे पाना नसीब कहते है लोग.
मानो न पा सके तो भी
सुनकर भी कुछ दास्तान
खुद में रुमानीयत को पा जाना है.
तेरी मेरी कहानी भी कहलायेगी
मुहब्बत..
मानो न पा सके तो भी
सुनकर भी कुछ दास्तान
खुद में रुमानीयत को पा जाना है.
तेरी मेरी कहानी भी कहलायेगी
मुहब्बत..

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