Monday, June 18, 2018

जादुई मिलन

पीछे छूट गई दुनिया से
बहुत आगे कहीं
रुक-सा गया था वक्त वहीं,
पहले तेरे जज्बातों की मिठास का
अपनेपन से घुलते चले जाना रुह तक,
फिर तेरी उँगलियों के संगीत का
कोई जादुई सुर छेड़ देना मेरे जिस्म पर
ममममम..... जादू ही था तेरा मिलना
जादूई था हमारा मिलन।

Photo by Jonathan Borba from Pexels



















छुए थे मेरे जीवन के हर तार तूने,
जिस तरह न छेड़ी हो कोई राग किसी ने
आज तक,
रोम-रोम मेरा रुहानी संगीत की महफिल
बन चुकी थी।
धुन जिसकी सिर्फ तुझे पता थी।
तूने बजाई भी खूब
एक हुनरमंद कलाकार की मानिद
मैं बजती रही- जैसे न थमना हो मुझे कभी
मममममम.......जादू ही था तेरा मिलना

जादुई था हमारा मिलन।

No comments:

Post a Comment

गुजारा

 सुबह की पहली किरण आँगन से निकलती हुई भीगी मिट्टी की सोंधी-सोंधी खुशबू से नींद खुलती है। photo credit pixbay from pexel दिन चढता  भीगी मिट्ट...