पीछे
छूट गई दुनिया से
बहुत
आगे कहीं
रुक-सा
गया था वक्त वहीं,
पहले
तेरे जज्बातों की मिठास का
अपनेपन
से घुलते चले जाना रुह तक,
फिर
तेरी उँगलियों के संगीत का
कोई
जादुई सुर छेड़ देना मेरे जिस्म पर
ममममम.....
जादू ही था तेरा मिलना
जादूई
था हमारा मिलन।
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| Photo by Jonathan Borba from Pexels |
छुए
थे मेरे जीवन के हर तार तूने,
जिस
तरह न छेड़ी हो कोई राग किसी ने
आज
तक,
रोम-रोम
मेरा रुहानी संगीत की महफिल
बन
चुकी थी।
धुन
जिसकी सिर्फ तुझे पता थी।
तूने
बजाई भी खूब
एक
हुनरमंद कलाकार की मानिद
मैं
बजती रही- जैसे न थमना हो मुझे कभी
मममममम.......जादू
ही था तेरा मिलना
जादुई
था हमारा मिलन।

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