Tuesday, June 5, 2018

डस्टर

जिन्दगी के ग्रीन बोर्ड पर
जब भी मैंने
रंग-बिरंगी चॉक से 
कुछ लिखा कभी
मिटा दिया तुमने 
शब्दों के डस्टर से उन्हें.

photo credit to wordpress.com









एक बच्चे की तरह
मिटाने में आता इतना आनंद 
कि तुम बिना एक अक्षर पढ़े
बस मिटाते चले जाते.
मैं लिखती - तुम मिटाते,
इस खेल-खेल में
भूल गयी हूं लिखना, 
लिखा था आखिर कब
कुछ याद नहीं है. 
अब तो अकसर 
ग्रीन बोर्ड वह
खाली ही रहता है.


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