Sunday, June 13, 2021

प्यार

ख्वाबों-ख्यालों में डुबा हुआ

बेवक्त-बेपरवाह हंसी बनकर

बेवजह होठों पर खिलता – प्यार।

Photo by How Far
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 from Pexels










सुबह की हल्की धूप

शाम की सुरखी में खनखनाता 

सिहरन की सीमा तक गुदगुदाता – प्यार।


हवा में जिन्दगी-सा लहराता

आधे पढ़े रोमांटिक नोवल की पंक्तियों में 

गुम हो जाता – प्यार।


फिर भी कसक में घुलकर रह जाता

बस ख्यालों का मीठा – प्यार


हकीकत की हथेली पर 

कभी न सिमटता

पास न आता -  प्यार


हाय ! 

क्या भीषण विडंबना,

प्यार को पूरा न पाना

हर जन्म, हर क्षण, हर युग में

अधुरेपन में पूर्णता ढूंढता – प्यार।

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