तलाश थी, जिस मुहब्बत के अहसास की
वो तुझसे हुई पूरी,
तब तूने जहन को झकझोर कर पुकारा,
'तुम हो बस मेरी'।
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हाँ, कितना सुकून देते हैं ये लफ्ज
ये सच है - तेरी भीवनाओं की बारिश में
मैं भींग चुकी हूं सरापा,
कसम हैं इसे ताउम्र सूखने न दूँगी।
प्रियतम, तेरी छुअन से,
फिर पा चुकी हूँ यौवन की पगडंडियाँ
मन की गिरह को
खोल रही हूँ अनजने ही।
जानते हो, कानों में कह गया इस बरस का सावन,
कि मोहताज नहीं हैं प्रेम उम्र का,
वह तो आज भी है मनचला।
जागे हैं सोये अरमान
तेरे आने से
जी चाहता है मचल जाए क्षण भर को मन।
छन-छन करती पायलों की रुनझन
कह आए सारी की सारी दुनिया को,
हाँ, मैंने मुहब्बत की है!
हाँ, मैंने मुहब्बत की है!
हाँ, ये सच है, मैंने मुहब्बत की है!

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