Friday, June 18, 2021

अजनबी, तेरी आवाज

 अजनबी, तेरी आवाज 

दिल के तार छू जाती है,

दस्तक दे जाती है लम्हा-लम्हा सूनी रूह में,

ऐसे में जुबान कुछ कहना नहीं चाहती।

Photo by Andrea Piacquadio from Pexels







होती है चाहत बस इतनी,

शाम-ओ-सहर तेरे लफ्जों का काफिला थमे नहीं,

दिल की मुट्ठी में समेट लूं,

तेरी कही-अनकही यादें।


कबूल हो दुआ मेरी 

तू रहें सदा मेरे पास,

बनकर एक रूहानी आवाज,

यही सिर्फ तेरी पहचान 

मयस्सर हो मुझे।


सूरत के सम्मोहन में क्या रखा है

जो आज हैं कल नहीं।

तेरी आवाज तेरा दिल है,

तेरी आवाज से जुड जाती हूँ

तेरी रूह से, तुझसे।


अजनबी, मेरे लिए

तेरी आवाज ही तू है। 

No comments:

Post a Comment

गुजारा

 सुबह की पहली किरण आँगन से निकलती हुई भीगी मिट्टी की सोंधी-सोंधी खुशबू से नींद खुलती है। photo credit pixbay from pexel दिन चढता  भीगी मिट्ट...