Friday, June 25, 2021

प्यार रूठा रहता है...

 रेल रूठा रहता है,

वो सफर रूठा रहता है

उसमें तुम्हारे साथ बिताए पल

रूठे रहते हैं,

और कहते हैं,

इस शहर ने तुम्हें तुम्हारा पहला प्याल दिया

प्यार करना सिखाया

निभाना, जताना सिखाया,

पर आज,

तुम्हारे यहाँ साथ न रहने से

ये शहर रूठा रहता है।

Photo by Jonathan Borba from Pexels











ट्रेन की धडकनों के साथ

मिल जाती थीं हमारी धडकनें

किसने क्या कहा?

किसने क्या सुना?

होश नहीं रहता था

फुरसत भी न थी

एक दूसरे के दिल पढ लेने की लय में,

क्या करूँ, 

अब वह फुरसत रूठा रहता है।


रेल चलेगी, चलती रहेगी, 

सफर भी,

पडाव आते रहेंगे कुछ अंतराल के बाद

धडकनों की आवाज भी गूँजती रहेगी,

पर ट्रेन से झाँकता, 

मेरी एक झलक का इंतेजार करता

वह चेहरा न होगा, 

कब फिर दिखेगा,

हाथों की लकीरें ही जानें,

इसलिए आजकल

मीठी यादों के दर्द में लिपटा,

प्यार रूठा रहता है। 

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