Monday, June 14, 2021

सुर्खियाँ

 जिन्दगी की पीठ पर

सरसकता है,

अवहेलना का चाबुक,

रिसने लगता है

रफ्ता-रफ्ता

जला हुआ खून।

Photo by Kat Jayne from Pexels







आत्मा से आवाज आती है-

'तू मर क्यों नहीं जाती!'


लोगों की नजरों में

लटके रह जाने की अभिलाषा,

बुझा देती है,

स्वाभिमान की आग।


समृद्धि की झूठी तस्वीर को

सीने से चिपकाए,

मैली जाँघ पर ही

बिकने लगी हैं सुर्खियाँ।

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