Sunday, June 20, 2021

गुमशुदा

 खोना था खो गई हूँ

'अपनों' के,

'रिश्तों' के,

'दायित्वों' के,

'गलतफहमियों' के,

'कटाक्षों' के बीच।

Photo by Nikita Khandelwal from Pexels







अब तो सूरत भी नहीं पहतानी जाती है।

और शायद सीरत भी नहीं।


रूह किसी और की लगती है

विचार ओढे हुए से लगने लगे हैं।

लाखों हथौडों के वार से

हो गया है मूल लापाता।


यकीन है यहाँ से लौटाई संभव नहीं,

हुआ तो अजूबा होगा,

किसी ने जादू की छडी घुमाई होगी।


सुना है ऐसे लापता लोगों की सुनवाई नहीं होती कहीं,

नहीं होती रहीं रपट भी।


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